कथा की लहरें

नीचे दी गई पट्टिका महाभारत के सभा-पर्व में वर्णित द्यूत-प्रसंग को दस दृश्यों में, संक्षिप्त एवं संयत भाषा में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक दृश्य के साथ एक अलंकारिक (केवल ज्यामितीय/पुष्प-रूपांकन आधारित, बिना किसी मानव या देव-आकृति के) सजावटी चित्रांकन जुड़ा है। कथा को तीर-चिह्न बटन, डॉट-नेविगेशन, अथवा कीबोर्ड (बायाँ/दायाँ तीर, Tab व Enter) से आगे-पीछे किया जा सकता है।

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प्रसंग की पृष्ठभूमि

महाभारत के सभा-पर्व में वर्णित यह द्यूत-प्रसंग कथा के सबसे निर्णायक मोड़ों में से एक माना जाता है। हस्तिनापुर की राजसभा में आयोजित इस खेल में शकुनि, जो पासों की कला में दक्ष बताए गए हैं, दुर्योधन की ओर से युधिष्ठिर के विरुद्ध खेलते हैं। कथा क्रमिक हार की एक शृंखला के रूप में आगे बढ़ती है — संपत्ति से राज्य तक, और अंततः व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक।

परंपरागत रूप से इस प्रसंग को द्यूत के विनाशकारी संभावित परिणामों के दृष्टांत के रूप में पढ़ा जाता है, न कि किसी क्रीड़ा-पद्धति की स्वीकृति के रूप में। अधिक विस्तृत नैतिक विवेचन के लिए नैतिक संदेश पृष्ठ देखें, तथा पात्रों के परिचय हेतु पात्र परिचय पृष्ठ देखें।